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दांतारामगढ़ का इतिहास | वीरेंदरसिंह की जीवनी | Specialty of Dantaramgarh

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आज से करीब 350 साल पहले की बात है वर्ष था 1669 जब जयपुर के कछवाहा राजवंश के छत्रप राजा वीर सिंह के पुत्र अमर सिंह द्वारा दातारामगढ़ ठिकाने की स्थापना की गई जो आजादी तक राजतंत्र के रूप में  व्यवस्था का हिस्सा हुआ करता था…   आजादी की सुबह के साथ जब व्यवस्था परिवर्तन हुआ तो यह व्यवस्था बदली और लोकतांत्रिक ढांचे ने आकार लिया। Dantaramgarh

ग्राम गणराज्य से लेकर देश की शीर्ष पंचायत संसद तक का सफ़र, जब आमजन के भीतर से उठे लोग करने लगे तो इसी आहट में दांतारामगढ़ क्षेत्र के ही एक किसान परिवार मे जन्मे सामान्य से बालक ने इस राजनीतिक सुगबुगाहट को अपने जेहन में उतारा और धीरे-धीरे राजनीति में वो मिशाल पेश की जो अपने आप में अनूठी और अद्वितीय रही…   किसान परिवार की पृष्ठभूमि को अपने भीतर थामे स्वतंत्रता सेनानी श्री पन्ने सिंह और दड़की देवी के इस नौनिहाल को नारायण सिंह चौधरी के रूप हमने और आप ने देखा और महसूस किया ।

दांतारामगढ़ का गौरवशाली सांस्कृतिक इतिहास

दांतारामगढ़ वह क्षेत्र है जिसके इतिहास के पन्ने जहा बेहद उज्ज्वलता लिए हुए है तो भविष्य की रूपरेखा भी स्पष्ट नजर आती है  यह धरती है भाई-बहन के अमिट प्रेम को अपने आंचल में समेटे हुए अरावली पर्वतमाला के उतुंग शिखर हर्षनाथ की पहाड़ी की गोद में शक्ति पीठ के रूप में जीणमाता का मंदिर स्थित है। यह ना केवल धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए एक पर्यटन स्थल मात्र है बल्कि यह सम्पूर्ण शेखावाटी अंचल की अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत को समेटे हुए हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है।  यह  हमारी आस्था का हृदय स्थल भी है।

दांतारामगढ़ क्षेत्र में ही अखिल भारतीय पहचान लिए हुए खाटू श्याम मंदिर के रूप में धार्मिक और सांस्कृतिक धरोवर है जहा उत्तरी भारत से लाखों की संख्या में तीर्थ यात्री शीश नवाते है अपनी मनोतिया मांगते है. जिसे हम फाल्गुन मास में रास्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर जयपुर तक और अनेकानेक बड़े शहरो से खाटूश्याम की तरफ धर्म पताका हाथ में थामे जयकारों की गूंज के रूप में कई सों किलोमीटर की जत्थे देख कर यहाँ की जन आस्था को महसूस कर सकते है. खाटू के श्याम बाबा जो कलियुग मे कृष्ण के अवतार में पूजे जाते है. खाटू के श्याम बाबा महाभारत  कालीन शीशदानी  के रूप में अपनी अमिट पहचान अपने भीतर समाए हुए है जो वर्तमान में राज्य का सबसे बड़ा आस्था का धार्मिक स्थल बन चुका है।

अब बात करते है इसी क्षेत्र के उस सख्सियत की, जिसने  ग्राम गणराज्य से लेकर विधानसभा तक न केवल एक जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी अमिट पहचान छोड़ी बल्कि चौधरी साहब के रूप में वो टेग प्राप्त किया जिसे कभी कथा कहानियों में सुना करते थे, जी हा ठीक पहचाने हम बात कर रहे है चोधरी नारायण सिंह बुरडक की.

किसान परिवार से ताल्लुख रखते स्वतंत्रता सेनानी पिता की गर्माहट अपने व्यक्तित्व में थामे श्री नारायण सिंह वर्ष 1959 से 1972 तक स्थानीय स्वशासन के तहत विभिन्न भूमिकाओं मे रहे, जहा जनमन की बात जानते हुए एक उम्दा राजनीतीज्ञ के रूप में उभरे… इसी की बदोलत

आप वर्ष 1972 में सर्वप्रथम विधानसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए। आप अपनी स्पष्टवादिता और कड़क स्वभाव के चलते वो खुदरंग राजनीतिज्ञ बने जिनका प्रभाव शासन-प्रशासन में मजबूती से महसूस किया जाता रहा। आपकी हामी ही काम की 100 % गारंटी हुआ करती थी।

आपने कभी चाटुकारिता वाली ना राजनीति की और ना ही ऐसी राजनीति करवाई.  टॉप टू बॉटम आपकी नीति उस चौधरी के रूप में रही जिसकी मिशाल कोई कथा कहानियों में दी जाती थी। आपने दिलासों और वादों वाली राजनीति नहीं की, आपकी राजनीति धरातलीय स्वरूप लिए मजबूत इरादों वाली रही जहां आमजन में विश्वास की प्रगाढता थी उसी का परिणाम रहा कि आप 7 बार विधानसभा में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

आपने गांव देहात मे छान – झूपों वाली बस्ती  से आलीशान बंगलों तक वाले बदलाव देखे,  तो वही आपने कृषि के क्षेत्र में बारानी  से सिंचित क्षेत्र में तबदीली  होते हुए देखी ।

आप ने खेती किसानी से लेकर जन सामान्य के विविध मुद्दों जैसे कुएं नलकूपों का विद्धुतिकरण हो, या फिर  पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अनेकानेक मुद्दे हो…आप ने विकास के वो आयाम गढ़े और बुने कि आज भी लोग चौधरी साहब के कामों की बात करटे है तो हरेक छोटे बड़े गाव में आप द्वारा करवाए कामो की लम्बी फैरिहस्त नजर आती है।

किसान हितों को लेकर, आपकी दूरदर्शिता का ही परिणाम रहा कि आपने वर्षो पहले पलसाना में कृषि उपज मंडी की स्थापना करवाकर क्षेत्र के किसानों को उन्ही के क्षेत्र मे अनाज बेचने की सुविधा उपलब्ध करवाई वहीं आपने खेती किसानी के तहत पशुपालन बढ़ावा देने व लोगों की आर्थिक गतिशीलता को विस्तार देने के लिए पलसाना मे जिला दुग्ध उत्पादन व वितरण समिति की स्थापना करवाई जिसके चलते क्षेत्र में पशुधन में वृद्धि हुई और लोगों की आर्थिक गतिशीलता को विस्तार मिला

आपने क्षेत्र की सेवा मे लम्बा अरसा बिताया, और दांतारामगढ़ को आज का आधुनिक स्वरूप दिया जिसके चलते आपको आधुनिक दांता रियासत के लोकतांत्रिक जन्मदाता कहे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

वर्ष 1972 से 2018 तक के 45 वर्षों के आपके राजनीतिक सफरनामें में आपकी राजनीतिक सक्रियता लगभग 33 वर्ष तक नेतृत्वकर्ता  के रूप में तो वही करीबन 12 वर्ष मजबूत विपक्ष के रूप में रही।

आपने संगठन को वो मजबूती प्रदान की जिसका आज भी कोई सानी नहीं है। आप प्रदेश कोंग्रेस संगठन में 3 वर्षो तक प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए कार्यकर्ताओ का मान सम्मान रखा। जिसके चलते संगठन में अनेकानेक नेतृत्वकर्ता  उभरे. आप के सानिध्य में ही वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा तैयार हुए जो आप ही की भांति एक मजबूत और निर्भीक नेतृत्वकर्ता  के रूप में कांग्रेस के प्रदेश संगठन को साध रहें है।

आप वर्ष 2004 से 2007 तक राज्य किसान आयोग के प्रथम प्रदेश प्रदेशाध्यक्ष रहे इस दौरान किसान हितों को लेकर आप ने जो नीतियां बनाई वो आज खेतों में बने हुए प्याज भंडारण सैड,  वाटर डिग्गियो, तारबंदी योजना, पाइपलाइन योजना… के रूप में देखी और महसूस की जा सकती है

वर्ष 1985 में आपके पुत्र वीरेन्द्रसिंह भी आपके साथ राजनीतिक गलियारों में चहलकदमी करने लगे. श्री वीरेन्द्रसिंह वर्ष 2000 में दातारामगढ़ पंचायत समिति चुनावों में निर्विरोध सदस्य बनकर,  सर्वाधिक मतों से प्रधानी की कमान संभाली।
लगातार पिता श्री नारायणसिंह चौधरी के चुनावी प्रबंध, और क्षेत्र के विकास में भागीदार बनते रहे। बढ़ती उम्र के चलते जब स्वास्थ्य साथ नहीं दिया तो आप के पुत्र वीरेन्द्र सिंह को 2018 की उम्मीदवारी मिली जो विजय में तब्दील हुई।

 श्री वीरेन्द्रसिंह भी पिता की भांति ही गंभीर व्यक्तित्व है. एक ऐसे राजनीतिज्ञ जो लम्बी लच्छेदार भाषणबाजी की बजाय कम शब्दों में नपी-तुली बात करते हुए आमजन के बीच बेहतर समन्वय के आधार पर एक सफल राजनीतिज्ञ साबित हुए।

आप प्रदेशाध्यक्ष रहे सचिन पायलट से लेकर वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गोविन्द सिंह डोटासरा तक एक मजबूत समन्वय तथा सरकार के मुखिया अशोक गहलोत से जुगलबंदी करते हुए विकास के वे आयाम स्थापित किए जो उन लोगों के सवालो का प्रत्युतर है कि वीरेन्द्र सिंह में वो बात नही है जो चौधरी साहब में रही।

वीरेन्द्र सिंह ने भी अपने पिताश्री के नक्शे क़दम पर काम करते हुए शासन – प्रशासन के साथ बेहतरीन समन्वय करते हुए क्षेत्र के विकास को नई रफ्तार और नया क्लेवर दिया।

दांतारामगढ़ क्षेत्र के विकासकार्य

 वो कहते है ना …

“मेरे हौसलों पे मुन्हसिर रही तक़दीर मेरी,
    हाथ की लकीर भी बदल गयीं जब सोचा मैंने!!

आप के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र मे किए गए क्रांतिकारी बदलाव –

  • आपने भी अपने पिताश्री की भाँति ही विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, आपने अपने क्षेत्र में 30 से अधिक विद्यालयों को क्रमोन्नति की सौगात दी तो वही क्षेत्र के 2 दर्जन विद्यालयों में विभिन्न संकाय स्वीकृत करवाए। साथ ही राज्य सरकार की शिक्षा के सन्दर्भ में अभूतपूर्व पहल के तहत अपने विधानसभा क्षेत्र दांतारामगढ़ में 3 दर्जन से अधिक महात्मा गाँधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय खुलवाए
  • वही भाजपा के समय की 3 दर्जन से ज्यादा बंद पड़ी स्कूलों को पुनः शुरू करवाया, तो वहीं विद्यालयों में इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने के लिए 36 करोड़ रूपए की लागत से नवीन कार्य सम्पादित करवाए  ।
  • आपने दो दर्जन से अधिक विद्यालयों में कंम्प्यूटर लैब स्थापित करवा कर क्षेत्र में बच्चों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई तो पलसाना मे खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का निर्माण करवाया ताकि बेहतर समन्वय के जरिए शिक्षा के क्षेत्र में नवीन आयाम स्थापित किए जा सके।
  • बालिका शिक्षा के लिए आपके विशेष प्रयासों के तहत ग्रामपंचायत बाय में कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की स्थापना की गई।
  • आज दातारामगढ़ क्षेत्र की प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो से तीन उच्च माध्यमिक विद्यालय है जो दातारामगढ़ क्षेत्र को संपूर्ण शेखावाटी अंचल में अग्रिम पंक्ति पर सुशोभित करते है जो कभी रहे आपके ही विजन का परिणाम है

आपने लोक स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए जो साहसिक कार्य किए वो अपने आप में बड़ी मिशाल नजर आते हैं

  • आपने धार्मिक आस्था की नगरी खाटूश्यामजी को विशेष तवज्जो देते हुए वहां उपजिला अस्पताल खुलवाया साथ ही वहां ऑक्सीजन प्लांट से लेकर बल्ड स्टोरेज प्लांट भी स्थापित किया ताकि देश भर से आने वाले हजारों-हजार श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की बेहतरी की जा सके।
  • आपके प्रयासों से ही बाय, जीणमाता, राणोली में 3 सामुदायिक  स्वास्थ्य केन्द्र यानी CHC स्थापित हुए  वही मदनी, धींगपुर, सुरेरा, करड़ सहित आधा दर्जन गांवों मे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र यानी PHC खुलवाए गए इसी तरह आप ने दर्जन भर गांवों मे उप-स्वास्थ्य केन्द्र यानि सब सेंटर स्थापित करवाए।
  • आपने दातारामगढ़ व राणोली में रेफरल सुविधाओं के बेहतर इंतजाम के लिए 65 लाख की लागत से अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 2 एम्बुलेंस उपलब्ध करवाए।
  • साथ ही आपने  राणोली पलसाना में ट्रोमा सेंटर की भी शुरुआत भी की, उलेखनिए है की सरकार की चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना, चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना, राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना  यानि RGHS  के साथ-साथ अस्पतालों के निःशुल्क दवा व जांच योजनाओं के साथ-साथ बड़ा हैल्थ सैट-अप स्थापित किया है जो लोक स्वास्थ्य के प्रति आपकी संवेदनशीलता को रेखांकित करता है।

खेती किसानी की खुशहाली के लिए आप के द्वारा किए गए अभूतपूर्व कार्य कुछ इस प्रकार है …

  • किसान हितों के संरक्षण हेतु आपने क्षेत्र के किसानो को अनुदानित दरों पर कृषि उपकरण व कृषि मशीनरी खरीदने के लिए आधा दर्जन गांवों मे किसान हायरिंग सेंटर स्थापित करवाए वहीं किसान हित में आधा दर्जन गांवो में किसान सेवा केन्द्रों की स्थापना करवाई।
  • आपने खाटूश्याम जी मे 3000 मीट्रिक टन क्षमता के वेयर हाउस की स्थापना करवाई जो इस क्षेत्र मे बड़ी उपलब्धि को रेखांकित करवाता है ।
    साथ ही पलसाना की कृषि उपजमंडी कार्यालय के लिए 2 करोड़ की लागत से बना भवन कृषि उपज मंडी को गतिशीलता प्रदान कर रहा है।
  • आपने सहकारिता को बढावा व विस्तार देने के लिए 10 नई ग्राम सहकारी समितियों की स्थापना करवायी, जिससे लोगों को कृषि कार्य के लिए अल्पकालीन ऋणों से लेकर अन्य कृषि सह उद्यमों की स्थापना में ऋण सुविधाए मिल पाएगी।
  • आपके द्वारा कृषि सह उद्यम पशुपालन के लिए भी अनेकानेक कार्य किए गए जो अपने आप में अनूठी मिशाल है आपने क्षेत्र के दो बड़े कस्बों दांता और पलसाना में उच्च स्तरीय पशु चिकित्सा लेबोरेट्री की स्थापना करवायी जो पशु चिकित्सा में सटीक इलाज को मार्ग-दर्शित करती है।
  • आप के द्वारा ही क्षेत्र के मोटलावास व चक ग्राम पंचायतों में प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय क्रमोन्नत करवा कर वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित करवाया गया।
  • साथ ही दर्जनों गांवों मे पशु चिकित्सा सब सेंटरों की स्थापना करवाई जिसके जरीए पशुधन सहायकों की सहायता से पशु-चिकित्सा के संदर्भ में ग्रासरूट स्तर पर काम कर रहे हैं।

जन सुरक्षा के संदर्भ में अनूठी पहलें

आपने लोगों की सुरक्षा की बेहतरी के लिए जहां दांतारामगढ़ में पुलिस उपाधीक्षक कार्यालय की स्थापना करवाकर, भवन के लिए 1 करोड़ की राशि स्वीकृत करवाई । तो वही  दांता पुलिस चौकी के  विस्तार के लिए 90 लाख की राशि स्वीकृत करवायी ताकि बेहतर संसाधन के साथ सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

आपने जीणमाता जी क्षेत्र मे नवीन पुलिस स्टेशन की स्थापना करवाई जिसमें क्षेत्र में कानून और सुरक्षा का प्रबंधन पुख्ता कर,  लोगों को सुखी और सम्पन्नता से लबरेज गरिमामई वातावरण में अपने जीवन को गतिशीलता मिल सके।

पेयजल जैसी अत्यावश्यक जरूरतों के लिए बड़े कदम

इसके अलावा आपके क्षेत्र मे डार्क जोन के चलते जहां पेयजल एक गंभीर समस्या रही है उसकी बेहतरी के लिए करीब 120 करोड़ रुपए की लागत के विभिन्न कार्य करवाए… जिसमे जल जीवन मिशन के तहत बने 70 से अधिक उच्च जलाशय हो… लोगो के घरों तक पानी की पहुंच सुनिश्चित करना हो या फिर 950 किलोमीटर लम्बी पाइप लाइन हो  ये सब आपने बेहतर जल प्रबंधन के लिए कार्य किए।

अपके ही प्रयासों से पेयजल की सुनिश्चितता के लिए कुम्भाराम लिफ्ट कैनाल पेयजल प्रयोजना के लिए 700 करोड़ रूपए की राशी आवंटित करवाइ जिसके चलते  पेयजल के सन्दर्भ में विधानसभा क्षेत्र का भविष्य सुरक्षित हुआ

आपने क्षेत्र की विभिन्न स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विगत पांच वर्षो में 300 से अधिक ट्यूबवेल खुदवाएं और 100 से अधिक हैंडपम्प लगवाएं। यानी “जल जीवन है।” के मूलमंत्र को अपने जेहन में सदैव बनाए रखा।

डामरीकृत सड़को के जाल के जरिए बढाई क्षेत्र में कनेक्टिविटी

आपके क्षेत्र में जहां धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर खाटूश्याम और जीणमाता जी मंदिर है तो ऐसे में संभाग मुख्यालय सीकर हो या फिर राज्य राजधानी जयपुर तक की कनेक्टिविटी हो, यातायात की निर्बाध व्यवस्था के लिए मजबूत सड़‌क नेटवर्क की आवश्यकता होती है

ऐसे में आपने सड़‌‌क कनेक्टिविटी को उच्च प्राथमिकता दी जिसके चलते करीब 370 करोड़ रूपए की लागत से 550 किलोमीटर डामरीकृत सड़‌को को जाल बिछाया। जिसमे 7 मीटर चोड़ी 2 दर्जन से अधिक सड़के बनाकर आवागमन को बेहतर किया

आपके द्वारा विधानसभा से गुजरने वाले 135 किलोमीटर लम्बे स्टेट हाई-वे का पुर्ननिर्माण करवाया गया जो लम्बी दूरी की यात्राओं में तीव्र गति के साथ कनेक्टिविटी को रेखांकित करता चला गया। वही

वही 100 करोड़ की लागत से सीसी ब्लोक सड़को व ग्रेवल सड़को का भी निर्माण करवाय, सडकों के इसी जाल से अब आपके क्षेत्र के गांव नगरीय स्वरूप लिए संभाग मुख्यालय सीकर और राजधानी जयपुर से दूर नहीं रह गए हैं। शहरो की कोचिंग व स्कूलों तक आवागमन के साथ-साथ व्यापार वाणिज्य के लिए भी आवागमन अब बहुत सहज व सुगम हो गया है।

आप ही के प्रयासों से जयपुर बीकानेर हाईवे से खाटू श्याम जी को जोड़ती हुई आधा दर्जन 7 मीटर चौड़ी सड़के श्रद्धालुओं के लिए सुगम यातायात प्रबंधन का बेहतरीन इंतजाम हुआ

प्रशासनिक ढांचे में व्यापक विस्तार-

आपने शासन प्रशासन की सबसे छोटी ईकाई ग्राम पंचायत की बेहतरी, लोगों की सुविधा और शासन की आमजन तक सुगम पहुंच के लिए क्षेत्र को सुनिश्चित करते हुए आपने

  • विधानसभा क्षेत्र में सामेर, अजबपुरा, राजपुरा-नौसाल, मगनपुरा, गिलों की ढाणी, रामपुरा सहित 6 नवीन ग्राम पंचायतों का गठन करवाया।
  • पंचायती राज व्यवस्था की मध्यवर्ती कड़ी पंचायत समिति के रूप में पलसाना को पंचायत समिति की सौगात दी।
  • इसी के साथ ग्राम पंचायत दांता को क्रमोन्नत करवाते हुए पंचायतीराज से स्वायत्त शासी निकाय नगर पालिका  बनवाया।
  • आप ही के प्रयासों से सामेर , मगनपुरा, बधाला की ढाणी, राजपुरा-नौसाल  सहित आधा दर्जन गांवों मे नवीन पटवार मंडल स्वीकृत करवाकर राजस्व सुविधाओं की पहुंच आमजन तक करने की कोशिश की तो वही शिक्षा के क्षेत्र में आपने प्रबंधन और समन्वय के कार्यालय के लिए पलसाना में खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का निर्माण करवाया ।
  • वहीं दांतारामगढ़ मे ADJ कोर्ट की स्थापना करवाई ताकि लोगों को विधिक न्याय, उन्ही के क्षेत्र में रहते हुए मिल सके। साथ ही पुलिस उपाधीक्षक कार्यालय दांतारामगढ़ के भवन का निर्माण भी आपकी न्याय और सुरक्षा के प्रति समर्पित सोच का परिचायक है।
  • अपने क्षेत्र के सबसे बड़े धार्मिक स्थल खाटू-श्याम मंदिर के VIP दर्शन बनने जा रही कल्चर को ब्रेक लगाने को लेकर संकल्प लेते हुए सर्वप्रथम अतिक्रमण हटवाने के लिए तात्कालिक SDM महोदया प्रतिभा वर्मा तथा जिला कलक्टर अमित यादव से बेहतर संवाद करते हुए अतिक्रमण हटाकर बेहतरीन व्यवस्था को धरातल पर उतार उसी का परिणाम रहा कि आज खाटू श्याम मंदिर परिसर पर्यटक फ्रेंडली हो चली है। साथ ही जनसामान्य की सुविधाओ के भी बेहतर कार्य किए है।
  • ऐसे ही अनेकानेक लोक कल्याणकारी कार्य विगत 5 वर्षों मे किए, जो यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत है कि लम्बे-चौड़े भाषण देने वाला ही सफल राजनेता नहीं होता है बल्कि वीरेन्द्र सिंह की भांति मितभाषी रहते हुए शासन-प्रशासन  से बेहतर जुगलबंदी करते हुए क्षेत्र का सर्वांगीण विकास किया जा सके ।
  • निश्चित रूप से आप शालीन व्यक्तित्व लिए हुए,   जमीनी जुड़ाव वाली राजनीति सख्शियत है, जो लोकतंत्र  की मूल रूप में नजर आती है जिसमे आमजन की शासन-प्रशासन से करीबिया महसूस की जा सकती है

सागर की अपनी क्षमता है, पर माँझी भी कब थकता है ;
जब तक साँसों में स्पन्दन है,  उसका हाथ नहीं रुकता है ।।

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Dantaramgarh FAQ

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